आजादी की ये खुली हवा,
यूं ही नहीं मिली है हमें...
न जाने कितने सर कटे हैं,
न जाने कितने घर लुटे हैं।
न जाने कितनी माएं रोई हैं,
न जाने कितनी जाने खोई हैं।।
वो वीर बड़े अलबेले थे,
भारत मां के सच्चे बेटे थे।
कर्ज दूध का चुका दिया,
देश पर सर्वस्व लूटा दिया।।
क्या वीर अभिमानी रहे हैं वो,
शत्रु से कभी न डरे है।
जब भी आन देश की रखनी हो,
जान अपनी सजाते थे।।
कतरा कतरा अपना देश को समर्पित कर दिया,
घमंड में चूर शत्रु को मिट्टी में मिला दिया।
भाग खड़ा हुआ शत्रु युद्ध के मैदान से,
इतना रौद्र रूप अपना दिखा दिया।।
ऐसे ही नहीं आया है ये दिन स्वतंत्रता का,
लहू से सिंचा है हर कतरा इस माटी का।
तीन रंगों में लिपटी है गाथा हर बलिदानी की,
शौर्य शांत और खुशहाली यही कथा है तिरंगे की।।
आओ आज शपथ उठाएं
मान न इसका कम होगा।
हमेशा नील गगन में
शान से लहराएगा यह तिरंगा।।
जय हिंद...
No comments:
Post a Comment