Saturday, August 16, 2025

कोशिशें बहुत की हमने

कोशिशें बहुत की हमने

उन्हें समझाने की,

पर उन्हें कहां कुछ समझना था।

कैसे बताते हाल-ए-दिल उन्हें,

उन्हें तो दुश्मनों से मिलना था ।।

ख्वाहिशों का दामन भी अब छूट चला है,

वो दोस्त भी अब मेरा रूठ चला है ।

न चाह कर भी एहसास तेरी दोस्ती का,

अब मेरा दिल छोड़ चला है ।।

यूं तो तेरी दोस्ती के लिए

समंदर भी कम था ।

फिर भी न जाने

तुझे क्या ग़म था ।।

नफरतों का आलम इतना गहरा हो गया,

कि हर एहसास उसमें डूब गया ।

गैरो से ज्यादा चोट अपनों ने दी,

हर रिश्ते से विश्वास उठ गया ।।

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