Friday, December 29, 2023

नारी

 नारी,

यह शब्द सुनते ही मन में एक सामान्य सी परिकल्पना यह उठाती है कि एक ऐसा व्यक्तित्व जिसे सारा जीवन कर्तव्यों का भार उठाना है। जिसे अपने आस पास के सारे रिश्तों को निभाना है। जिसे परिवार और समाज के लिए ही अपना जीवन समर्पित करना है।

भारतीय समाज में नारी एक महान प्राणी है। जिसके बीना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

यदि सनातन धर्म की बात की जाए तो नारी ही जीवन है। नारी के बीना इस धरा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। नारी को पूजनीय माना है। यहां तक भी कहा गया है कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवता"। नारी के सम्मान की बात यही खत्म नहीं होती है। सनातन धर्म ने हर वो चीज़ जो हमारा पालन करती है उसमे भी नारी तत्व को देखा है। जैसे - प्रकृति माता, धरती माता आदि।

सनातन धर्म में तो स्वयं ईश्वर को भी शक्ति के अधीन बताया है और नारी शक्ति का ही प्रतीक है। जैसे - शिव में इ की मात्रा शक्ति स्वरूप है। इसके अतिरिक्त सीताराम, राधेकृष्णा आदि।

पारिवारिक रूप में भी नारी का स्थान सर्वोच्च है। नारी जब कन्या रूप में हों तो दुर्गा है, जब विवाह योग्य हो तो लक्ष्मी है, जब माता होती है तो सरस्वती है।

सामाजिक धार्मिक रूप में भी नारी का बहुत महत्व है। कोई भी सामाजिक धार्मिक अनुष्ठान नारी के बीना अधूरा है। जैसे - कन्या पूजन, हवन में पत्नी के रूप में आदि।

ये सब कार्य सनातन धर्म में नारी को सर्वोच्च स्थान प्रदान करते है।

Saturday, December 2, 2023

हमारी पहचान

भारत सदैव ही एक धर्म प्रधान देश रहा है. भारत में प्राचीनकाल से ही धर्म को सदैव सर्वोपरि रखा गया है. भारतीय साहित्य के आधार पर यह कहा जाता है कि भारत में आदिकाल से ही सनातम धर्म विद्यमान रहा है. सनातन धर्म में न उसका प्रारंभ है और न ही उसका अंत है.

कालांतर में भारत में भी कई प्रकार के धर्मो का आविर्भाव हुआ. इनमे से कुछ धर्म विदेशी है तो कुछ धर्म यहीं की परिस्थितियों के कारण पनपे है.

भारत की पहचान आज भी विविधता में एकता ही है. 

भारत में कई धर्म होने के बाद भी भारत आज समूचे विश्व के सामने एक रूप में खड़ा है. यही हमारी ताकत भी है. भारत अनादिकाल से ही धर्म प्रधान रहा है. भारत पूर्व में सनातन संस्कृति वाला देश रहा है. सनातन धर्म में भारत में ज्ञान का सर्वोच्च विकास हुआ. सनातन संस्कृति ने जो ज्ञान प्रकाश इस संसार को दिया है वो आज भी प्रकाशमान है. वहीँ कालांतर में भारत भूमि पर अनेकानेक संस्कृतियों का विकास हुआ. सभी का यहाँ पूरा सम्मान हुआ. सभी आपस में मिलकर एक नयी भारतीय संस्कृति के रूप में हम सबके सामने है.

भारत की यही विविधता आज समूचे विश्व के लिए एक आदर्श है.

मेरी बात

आज बस यूं ही जिंदगी ने फिर एक सवाल पूछ लिया "गलती किसकी" ? किसी का बुरा नहीं चाहना और न ही करना। फिर भी हमेशा बुरा बन जाना। खैर,...