Sunday, September 14, 2025

मेरी बात

आज बस यूं ही जिंदगी ने फिर एक सवाल पूछ लिया "गलती किसकी" ?
किसी का बुरा नहीं चाहना और न ही करना। फिर भी हमेशा बुरा बन जाना।
खैर, अपनी तो चलती रहेगी।
लेकिन कई ओर भी ऐसे लोग है जो ऐसे हैं।
लगता था कि ये हमारे साथ ही हो रहा है। फिर जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए, हकीकत से रूबरू होते चले गए। अपने जैसे कई ओर भी हैं।
अच्छे के साथ अच्छा ही होगा। बस यही सोच कर जी लेते हैं।
दुनिया का क्या है, ये तो मतलबी है।
जब तक आपका उपयोग किया जा सकता है, तब तक आपकी है और उपयोग पूरा होते ही आप कौन - मै कौन।
बड़ी शिद्दत के साथ हमने सबका साथ दिया। चाहे काम हो या नाम, हमेशा ईमानदारी से हो किया है। जब भी हाथ बढ़ाया है तो मजबूती से दूसरों का हाथ पकड़ा है। हर क्षेत्र से जहां हम जुड़े हैं अपना ही समझ के काम किया है। बस यही ईमानदारी और सच्चाई हमारी कमाई है। लेकिन दुनिया को पहचानने में थोड़ा कमजोर रह गए। हर किसी को अपना समझ कर उसको सिर माथे बिठाया। चारों तरफ दुश्मन खड़े थे और हम अपने समझ रहे थे।
फिर एक दिन वो भी आया जब सब साफ हो गया। दुश्मनों का खेल खत्म हो गया। देर से ही सही पर जिंदगी ने बहुत बड़ा सबक सिखा दिया।
दुनिया का दस्तूर तो देखो " सूर्य को देवता मानती है। सुबह के समय पूजती है, जल चढ़ाती है। लेकिन वहीं सूर्य जब शाम को अस्त हो रहा होता है तो यही दुनिया उसे देखने से भी मना कर देती है। पूजा और जलार्पण तो बहुत दूर रहा। फिर अगले दिन वही सूर्य उदय होता है तो फिर पूजा करती है।" बस इसी उदाहरण से हमने भी जीना सिख लिया है।
जब हम मजबूत थे तो दुनिया सलाम कर रही थी, थोड़े से कमजोर क्या हुए दुनिया ने मुंह मोड़ लिया। कोई बात नहीं...। जैसे डूबने वाला सूर्य अगले दिन फिर उदय होता है, हम भी होंगे। जब हम आयेंगे तो ये दुनिया फिर झुकेगी।
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Thursday, August 21, 2025

अब भोर हुई, अब भोर हुई

तेरी आवाज़ सुन कर घर से बाहर निकले,
पर तू नजर नहीं आ रही थी।
नाउम्मीदी में फिर पलट गए घर की ओर,
देखा तो तू घर में ही थी।।

हर वक्त मेरे सामने ही रहती थी,
हर पल मेरे साथ ही थी।
तुझको जान न सका, पहचान न सका,
शायद आंख मेरी खुलनी बाकी थी।।

जब धूप होती थी थोड़ी तेज,
तो तू आंचल बन जाती थी।
जब हवाएं होती थी विकराल,
तो तू ढाल बन जाती थी।।
जलती थी जब जिंदगी मेरी आग की तरह,
तो तू शीतलता बन जाती थी।
जब प्यास रह जाती थी अधूरी मेरी,
तो तू नीर बन जाती थी।।

पर जाने तू थी कहां,
कभी नजर आई नहीं।
एहसास तेरा हर वक्त रहा,
पर तू दिखाई दी नहीं।।
जब भी नजर उठती थी,
चार दीवार और मै था।
एक खामोश सन्नाटा,
हर वक्त छाया रहता था।।
खामोशी का ये मंजर,
बड़ा जानलेवा था।
नजर कुछ नहीं आ रहा,
एक भयानक अंधेरा था।।

फिर किसी ने,
दीप एक जलाया कोई।
छटा अंधियार हुआ उजाला,
एक रोशनी सी आई कोई।।
चारों ओर दिखने लगा था,
आंखों में चमक सी आई।
हमें भी लगा,
अब भोर हुई, अब भोर हुई।।

Monday, August 18, 2025

चिराग भुला दिए जाते हैं...

चिराग भुला दिए जाते हैं...

हर नए सफर में कुछ परेशानियां होती है,
कुछ पुराने लोग छूटते है और कुछ नए मिलते जाते हैं।

सफर चाहे कठिन हो
चाहे परिस्थितियां विपरीत हों,
सफर फिर भी रुकता नहीं।
हर चोट को अपने में समा लो,
बिना चोट के जीवन कुछ सीखता नहीं।।

जब जलते हैं चिराग अपने गरौंदे में,
तो उजाले होते हैं।
जो रोशन न कर सके अंधेरे को,
वो चिराग भुला दिए जाते हैं।।
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Saturday, August 16, 2025

कोशिशें बहुत की हमने

कोशिशें बहुत की हमने

उन्हें समझाने की,

पर उन्हें कहां कुछ समझना था।

कैसे बताते हाल-ए-दिल उन्हें,

उन्हें तो दुश्मनों से मिलना था ।।

ख्वाहिशों का दामन भी अब छूट चला है,

वो दोस्त भी अब मेरा रूठ चला है ।

न चाह कर भी एहसास तेरी दोस्ती का,

अब मेरा दिल छोड़ चला है ।।

यूं तो तेरी दोस्ती के लिए

समंदर भी कम था ।

फिर भी न जाने

तुझे क्या ग़म था ।।

नफरतों का आलम इतना गहरा हो गया,

कि हर एहसास उसमें डूब गया ।

गैरो से ज्यादा चोट अपनों ने दी,

हर रिश्ते से विश्वास उठ गया ।।

Wednesday, August 6, 2025

आजादी की ये खुली हवा

आजादी की ये खुली हवा,

यूं ही नहीं मिली है हमें...

न जाने कितने सर कटे हैं,

न जाने कितने घर लुटे हैं।

न जाने कितनी माएं रोई हैं,

न जाने कितनी जाने खोई हैं।।

वो वीर बड़े अलबेले थे,

भारत मां के सच्चे बेटे थे।

कर्ज दूध का चुका दिया,

देश पर सर्वस्व लूटा दिया।।

क्या वीर अभिमानी रहे हैं वो,

शत्रु से कभी न डरे है।

जब भी आन देश की रखनी हो,

जान अपनी सजाते थे।।

कतरा कतरा अपना देश को समर्पित कर दिया,

घमंड में चूर शत्रु को मिट्टी में मिला दिया।

भाग खड़ा हुआ शत्रु युद्ध के मैदान से,

इतना रौद्र रूप अपना दिखा दिया।।

ऐसे ही नहीं आया है ये दिन स्वतंत्रता का,

लहू से सिंचा है हर कतरा इस माटी का।

तीन रंगों में लिपटी है गाथा हर बलिदानी की,

शौर्य शांत और खुशहाली यही कथा है तिरंगे की।।

आओ आज शपथ उठाएं

मान न इसका कम होगा।

हमेशा नील गगन में

शान से लहराएगा यह तिरंगा।।

जय हिंद...

Thursday, May 30, 2024

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 


आज प्रण करें कि तंबाकू के साथ ही नशे का सेवन भी नहीं करेंगे।


आज के दिवस पर थोड़ी चर्चा...


👉तंबाकू सेवन के घातक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये प्रत्येक वर्ष 31 मई को 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' के रूप में मनाया जाता है। 


👉विश्व तंबाकू निषेध दिवस की घोषणा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य राष्ट्रों द्वारा वर्ष 1987 में की गई ताकि तंबाकू महामारी से होने वाली मृत्यु तथा बीमारियों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया जा सके। 

वर्ष 1988 में संकल्प WHA 42.19 पारित कर प्रत्येक वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने का आह्वान किया गया था।


👉मुख्य विषय: - 


विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2022 की थीम "पर्यावरण की रक्षा" है।

WHO के अनुसार, "पर्यावरण पर तंबाकू उद्योग का हानिकारक प्रभाव व्यापक रूप से बढ़ रहा है, जिससे हमारे ग्रह पर “दुर्लभ संसाधनों और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र” पर पहले से ही उपस्थित दबाव में अनावश्यक वृद्धि हो रही है।"


WHO प्रत्येक वर्ष तंबाकू के उपयोग को रोकने के लिये सरकारों, संगठनों और व्यक्तियों द्वारा किये गए प्रयासों और योगदान के लिये उन्हें सम्मानित करता है।


इस वर्ष WHO ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस (WNTD) पुरस्कार-2022 के लिये झारखंड का चयन किया है।


तंबाकू के सेवन से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव: 

तंबाकू की लत को दुनिया भर में रोके जा सकने वाली मौतों और विकलांगता का सबसे बड़ा कारण माना गया है।


तंबाकू के सेवन से हर वर्ष लाखों लोगों की मौत होती है।


भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 35 मिलियन मौतें तंबाकू के सेवन की वजह से होती हैं और यह तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता एवं उत्पादक देश भी है।


विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष लगभग 80 लाख लोगों की मृत्यु तंबाकू के सेवन से होती है, जिनमें5 लाख भारतीय शामिल हैं।

धूम्रपान कैंसर, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) और पेरिफेरल वैस्कुलरडिज़ीज़ (PVD) से मौत का कारण बनता है।


विश्व में धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। महिलाओं को अतिरिक्त खतरों का सामना करना पड़ता है जैसे- प्रतिकूल गर्भावस्था के परिणाम, महिला विशिष्ट कैंसर जैसे- स्तन, गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर और हृदय संबंधी जोखिम में वृद्धि आदि।


यदि निरंतर और प्रभावी पहलों को लागू नहीं किया जाता है तो महिला धूम्रपान की व्यापकता वर्ष 2025 तक 20% तक बढ़ने की संभावना है।


👉 तंबाकू का पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव : 


ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन: तंबाकू से एक वर्ष में 84 मेगा टन से अधिक ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है।


मृदा और जल संदूषण: सिगरेट के बट्स व एकल उपयोग वाले जैव अनिम्नकरणीय पाउच और ई-सिगरेट के माइक्रोप्लास्टिक द्वारा मृदा में विषाक्त पदार्थों के मिश्रण के कारण यह मृदा एवं जल को दूषित करता है।


सिगरेट बनाने के लिये जल की बहुत अधिक मात्रा का उपयोग किया जाता है फलस्वरूप यह अत्यधिक जल का दोहन करता है।


👉भारत के संदर्भ में आँकड़े : 


29 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों चंडीगढ़व पुद्दुचेरी में किये गए ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (2010) ने पुरुषों के बीच गिरावट की प्रवृत्ति और 2005-09 के दौरान महिला धूम्रपान की समग्र बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाया है। 


महिलाओं के बीच बढ़ती व्ययक्षमता और वैश्वीकरण तथा आर्थिक संक्रमण के कारण सामाजिक एवं सांस्कृतिक बाधाओं के कमज़ोर होने को इस खतरनाक प्रवृत्ति के कुछ प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा सकता है। 


👉तंबाकू की खपत को रोकने के लिये प्रमुख पहल : 


तंबाकू नियंत्रण पर डब्ल्यूएचओ ढाँचागत संधि (FCTC): यह WHO के तत्त्वावधान में की गई पहली अंतर्राष्ट्रीय संधि है। 


इसे 21 मई, 2003 को विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) द्वारा स्वीकार किया गया और 27 फरवरी, 2005 को लागू हुई।


👉तंबाकू के उपयोग से निपटने के लिये FCTC द्वारा अपनाए गए उपाय :


मूल्य और कर उपाय


तंबाकू के पैकेट पर बड़े-बड़े शब्दों मेंमुद्रित चेतावनियाँ  

100% धूम्रपान मुक्त सार्वजनिक स्थान

तंबाकू के विपणन पर प्रतिबंध

धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक लोगों की सहायता 

तंबाकू उद्योगों द्वारा  हस्तक्षेप की रोकथाम 

WHO ने MPOWER की शुरुआत की है जो तकनीकी उपायों और संसाधनों का एक संयोजित व संयुक्त प्रयास करता है, जिनमें से प्रत्येक WHO के FCTC कार्यक्रम केकम-से-कम एक प्रावधान से मेल खाता है। 


👉राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP): भारत सरकार ने वर्ष 2007 मेंनिम्नलिखित उद्देश्यों के साथ राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की  शुरुआत  की : 


तंबाकू सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना।


तंबाकू उत्पादों के उत्पादन और आपूर्ति को कम करना।


"सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का निषेध, व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003" (COTPA) केप्रावधानों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना। 


तंबाकूको छोड़ने में लोगों की सहायता करना। 


WHO की ढाँचागत संधि द्वारा अनुशंसित तंबाकू की रोकथाम और नियंत्रण के लिये रणनीतियों के कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करना।


लोगों में जागरूकता बढ़ाना एवं तंबाकू उत्पादों पर उच्च कराधान।


विज्ञापनों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूपों पर प्रतिबंध।


तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान करना। 


पर्यावरण की क्षति के लिये तंबाकू कंपनियों पर दंड लगानाा। 


तंबाकू किसानों को स्थायी और वैकल्पिक फसलों में स्थानांतरित करने के लिये प्रोत्साहित करना तथा उनका समर्थन करनाा।


स्कूल स्तर से स्वास्थ्य शिक्षा, धूम्रपान करने वालों की कैंसर की जाँच और धूम्रपान छोड़ने वालों के लियेकैंसर के शीघ्र उपाय प्रदान करना। 

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Friday, March 8, 2024

छुईमुई का पौधा

आज आप के साथ एक बेहद ही शर्मीले और नाजुक पौधे छुईमुई के बारे में जानकारी साझा कर रहा हूँ। 

छुईमुई को शेम प्लांट, लाजवंती, संवेदनशील पौधा, टच मी नॉट प्लांट, स्लीपी प्लांट, एक्शन प्लांट जैसे कई नामो से जाना जाता हैं पुकारा जाता हैं। वहीं इसे वनस्पति जगत में माईमोसा पुदिका के नाम से जाना जाता है। यह पौधा आदिवासी अंचलों में हर्बल नुस्खों के तौर पर अनेक रोगों के निवारण के लिए उपयोग में लाया जाता है।

पौधे का वैज्ञानिक नाम  मिमोसा पुडिका है। इसके फूलो का रंग गुलाबी और छोटे होते हैं। कुछ विशेष प्रजातियों में फूलो का रंग पीला और सफेद भी होता है। इसकी लगभग 8 से अधिक प्रजाति होती हैं, इसमें 2 से 3 पेड़ वाली प्रजाति, 2 से 3 छोटी झड़ी नुमा प्रजाति, लता नुमा प्रजाति, पानी वाली प्रजाति और छाया पड़ने मात्र से मुरझा जाने वाली प्रजाति भी शामिल है। छुईमुई की लता और पेड़ वाली प्रजाति परिपक्त होने पर आकार में 5 फीट की ऊँचाई तक लंबी हो जाती है।

पौधा कब लगाये

घर पर छुईमुई का पौधा लगाने का सबसे अच्छा समय वसंत ऋतु अर्थात फरवरी से अप्रैल माह के बीच का होता है, लेकिन यदि आप गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में रहते हैं, तो आप अत्यधिक ठंड का मौसम छोड़कर, साल भर में इसे किसी भी समय लगा सकते हैं।

पौधा कैसे तैयार करें

पौधे को बीज से, कटिंग से या लेयरिंग विधि से आसानी से तैयार कियाजा सकता है। इसके बीज आप आसानी से किसी भी ई-कॉमर्स प्लेटफार्म से या पास की खाद बीज की दुकान से ले सकते हैं। आप तैयार पौधा भी किसी भी नर्सरी से लेकर आ सकते हैं। 

पौधे के लिए मिट्टी

छुईमुई के पौधे को मिट्टी हल्की, नम और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी चाहिए, जिसका PH 6 से 7 तक हो। आप घर पर ही बढ़िया उर्वरक वाली मिट्टी भी तैयार कर सकते हैं, इसके लिए 40% सामान्य मिट्टी, 30% वर्मी कम्पोस्ट, 20% रेत और 10% कोकोपीट को अच्छे से मिला कर मिश्रण बनायें, फिर इस पोटिंग साइल को ग्रो बैग में भरें और नमी के लिए पानी दें।

सूर्य प्रकाश या रोशनी

छुईमुई का पौधा आंशिक इंडोर प्लांट है। पौधे को दिन की 8 घंटे की तेज उजाले वाली रोशनी मिलना जरूरी है। अगर कुछ घंटे धूप भी मिल जाता है तो कोई परेशानी नही है, पर अंधेरे या कम उजाले में रखने से पौधा फूल बिल्कुल भी नही देगा। छुईमुई के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए 15 से 29 डिग्री सेल्सियस का तापमान आदर्श होता है।

पानी

पौधे को प्रतिदिन पानी देने की आवश्यकता नही होती हैं। पर हल्की नमी पौधे को पसंद है। इस लिए नमी बनाकर रखे पर जलभराव से बचें। मिट्टी को कभी भी पूरा सूखने नहीं दे। सीमित मात्रा में ही वृद्धि के अनुसार ही पानी दे। 

खाद

पौधे को बढ़ने के लिए खाद की अधिक आवश्यकता नही होती हैं। इस लिए पौधा लगाने के बाद साल में 1 या 2 बार आप इसे वर्मीकम्पोस्ट या गाय के गोबर से तैयार खाद दे सकते है। बढ़ते मौसम में आप प्रत्येक 10-15 दिन के अंतर में कोई भी तरल खाद इस पौधे को दे सकतें है।

मौसमी देखभाल

छुईमुई का पौधा ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। ठंडे मौसम में इसे घर के अंदर ही रखें। सर्दियों में अधिक पानी देने से बचें। तेज गर्मी से भी पौधे की रक्षा करें। पौधे की पत्तियां झुलस सकती है। पौधा सुख भी सकता है। पौधे की जड़ में महीने में 1 से 2 बार फंगीसाइड का प्रयोग जरूर करें।

लाभ

1) छुईमुई की जड़ स्वाद में अम्लिय तथा कठोर, तासीर ठंडी होती है। चरक संहिता के संधानीय एवं पुरीषसंग्रहणीय महाकषाय में तथा सुश्रुत संहिता के प्रियंग्वादि व अम्बष्ठादि गणों में इसकी गणना की गई है।

2) छुईमुई के पौधे में एंटीवायरल गुण होते हैं जो पेट के इंफेक्शन को कम करने के साथ ही पेट की कई बीमारियों से राहत देते हैं।

3) छुईमुई में एनाल्जेसिक गुण होता है, जो दर्द को कम करने का काम कर सकता है। पेट दर्द में इसके पत्तों और शहद के पेस्ट को खाली पेट उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

4) छुईमुई का पौधा डायरिया की समस्या में भी राहत पहुंचा सकता है।

5) छुईमुई के पौधे में डायबिटीज कंट्रोल करने वाले भी गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं।

6) छुईमुई चेहरे पर दाने और मुंहासे से आराम देता है। पत्तियां खून को साफ करने के साथ ही पिंपल को कम करती है।

7) छुईमुई घावों को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए बहुत ज्यादा सक्षम होता है। इसकी जड़ों का 2 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार गुनगुने पानी के साथ लिया जाए तो आंतरिक घाव जल्द आराम पडऩे लगते हैं।

8) छुईमुई की जड़ और पत्तों का चूर्ण दूध में मिलाकर दो बार देने से बवासीर और भगंदर रोग ठीक होता है। छुईमुई के पत्तों का एक चम्मच पाउडर दूध के साथ प्रतिदिन सुबह शाम लेने से बवासीर या पाइल्स में आराम मिलता है।

9) छुईमुई की जड़ों का काढ़ा तैयार कर सर्पदंश होने पर प्रभावित शारीरिक अंग पर लगाने से जहर का असर कम हो जाता है। सर्पदंश होने पर रोगी को इस रस का सेवन भी कराया जाता है।

वास्तु शास्त्र में छुईमुई के पौधे को बहुत शुभ माना जाता है। इस पौधे को अपने घर के पूर्व दिशा या ईशान कोण में लगाना सबसे ज्यादा शुभ होता है। इन दिशा में रखने से यह पौधा सौभाग्य, समृद्धि और सुरक्षा को आकर्षित करने में मदद करता है। आप इसे नियमित जल दें और इसे मुरझाने से बचाएं। पौधे की नियमित रूप से छंटाई करें और सूखी हुई पत्तियों को हटाते रहें। ऐसा करने से आपकी कुंडली से राहु दोष दूर होता है। छुईमुई का पौधा शनि देव का प्रिय माना जाता है। यह पौधा घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। ध्यान रखें इस पौधे के आसपास गंदगी ना रहे।

मेरी बात

आज बस यूं ही जिंदगी ने फिर एक सवाल पूछ लिया "गलती किसकी" ? किसी का बुरा नहीं चाहना और न ही करना। फिर भी हमेशा बुरा बन जाना। खैर,...